तिरछी नज़र/ बलजीत बल्ली ...अच्छी छवी के लिए चाहिए अमरीकी सर्टिफिकेट लेकिन सीख नहीं |
| हाकी टीम की इन्सल्ट तो पहिले ही हो चुकी थी |
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TIRCHHI NAZAR BY BALJIT BALLI , BHASKAR, CHANDIGARH,SEPT.,16,2011 |
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मई ,२०११ में मैं अमरीका में था.15 दिन के करीब वहां गुज़ारे .न्यू यार्क , न्यू जर्सी ,सिनिसिनेटी तथा सिआ
टेल में घूमा. बहुत सा सफर सड़क रस्ते भी किया . यहाँ तक की कनाडा के टोरोंटो शहर से न्यू यार्क तक साढ़े ९ घंटे का सफर भी भी मोटर गाडी में किया .कनाडा से यू एस का बोर्डर भी सड़क रस्ते पार किया और वापसी पे सिएटल से वैंकूवर जाने के लिए भी कनाडा में सडक के रास्ते से दाखल हुआ.न्यू यार्क में वर्ल्ड ट्रेड सेंटर की जगा 9 /11 की याद दिलाते ग्राऊंड जीरो को देखने भी गया था. यह वो समा था जब बिन लादेन को मारे हुए अभी कुछ ही दिन हुए थे. अल्क्यादा का सबसे बड़ा दुश्मन अमरीका और उतना बड़ा आतंकी हमलों का खतरा.भारत में जब कोई ऐसा मौका होता है तो चप्पे चप्पे पे पुलिस और दूसरी फ़ोर्स लगी होती है. लेकिन अमरीका में ऐसा कुछ नहीं था .चौकसी जरूर थी लेकिन इन शहरों के बीच, विशाल मोटरवेज़ /हईवेय्ज़ पर या किसी भी छोटी या बड़ी सडक या हाईवे पर कही भी कोई रूकावट नहीं थी.ना ही कहीं सुरक्षा बल दिखाई दिए और ना ही कहीं रास्ते रोक कर खड़ी पुलिस . किसी भी सडक पर कोई सुरक्षा बैरीकेड लगा नहीं दिखाई दिया. अब तो टोल बेर्रिएरों पर भी ईजी पास के ज़रिये बिना रुके ही आगे जाने की व्यवस्था भी कर दी गई है.और यह रिकॉर्ड है कि 9 /11 के बाद आज तक एक भी आतंकवादी हमला अमरीका पर नहीं हुआ. दूसरी ओर हमारे देश में और खासकर पंजाब और चंडीगढ़ में आपको जगा-जगा हथिआर्बन्द सुरक्षा बल मिलेंगे ,हर छोटी बड़ी सडक पर बैरीकेड आका रास्ता रोकेंगे .जब वहां पुलिस कर्मी नहीं भी होते तो भी बेमतलब ही लोहे के भद्दे से बैरीकेड आपका रास्ता रोक कर अच्छे भले चलते ट्रैफिक को स्लो कर देंगे.फिर भी लगतार आतंकी हमले भी होतें हैं और दोषी आसानी से भाग भी जातें हैं.
जब यू. एस ए किसी भारती सरकार या नेता के बारे में कोई अच्छी या बुरी टिप्पणी करता है तो हम उसको सर्टिफिकेट मान लेते हैं .अगर वहां की किसी खोज कमेटी ने नरेंद्र मोदी कि तारीफ़ कर दी तो वो एक ही दिन में दूध के धुले हो गए और सभी ने उनको प्रधान मंत्री का दावेदार भी फटाफट मान लिया.यह भी नहीं पता कि इस के पीछे अमरीकी हकूमत का मकसद कया है .शायद यह हमारी गुलाम मानसिकता का ही प्रतीक है.सवाल यह है कि हम उनसे यह सीख क्यों नहीं लेते फजूल के बैरीकेड लगा के रुकावटें खड़ी करने की बजाये आधुनिक तकनीक से तथा अपने सुहिया और सुरक्षा तंतर को कारगर बनाके आतंकवादी अपराध रोकने या दोषिओं को पकड़ने के तौर तरीके अपनाये जाएँ .परवासी भारती यह सवाल भी करते हैं कि हमारे नेता और अधिकारी वहां जाते हैं तो तो लौट कर ऐसे सिस्टम को भारत में क्यों नहीं लागू करते ?
हाकी का फईनल मैच क्यों नहीं दिखा टी वी पे ?
इनाम के मामले में एशियन जेतु हमारी हाकी टीम कि इन्सल्ट का मुद्दा उठा और पंजाब के डेपुटी मुख्य मंत्री सुखबीर बादल की अच्छी पहिल से उनका मायक सन्मान भी हुआ.लेकिन हमरे पास उस इन्सल्ट का क्या जवाब है की चीन में हुए उस फाइनल मैच को कही भी किसी भी सरकारी या प्राइवेट रेडियो या टी वी चैनल ने नहीं दिखाया .लोग मैच कि खल्क देखने को तरसते रहे. लाइव दिखाना तो दूर की बात रही मैच के शॉट भी देखने को नहीं मिले.क्या अजय माकिन, भारत सरकार ,हाकी इंडिया हमारा मीडिया भी इस के लिए उत्तरदाई नहीं है ?
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